जालौर (बागोड़ा)। बागोड़ा क्षेत्र के दादाल गांव में इंडस्ट्रियल पार्क के लिए आवंटित भूमि को लेकर चल रहा गतिरोध अब और उग्र हो गया है। भूमि आवंटन रद्द करने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले छह दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। मंगलवार को यह विरोध प्रदर्शन उस समय बड़े विवाद में बदल गया जब जमीन पर काम शुरू कराने को लेकर धरने पर बैठे ग्रामीणों और कंपनी के कर्मचारियों के बीच आमना-सामना हो गया और स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।

आरएलपी नेता का मिला साथ, काम रुकवाने पर हुआ हंगामा

ग्रामीणों के इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। मंगलवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के वरिष्ठ नेता थानसिंह डोली धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करते हुए जमकर नारेबाजी की। इस बीच, जब इंडस्ट्रियल पार्क के लिए चिन्हित जमीन पर ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनों से समतलीकरण (सफाई) का कार्य शुरू किया गया, तो आंदोलनकारी ग्रामीण काम बंद कराने के लिए वहां पहुंच गए। दोनों पक्षों के बीच काम रोकने को लेकर जोरदार बहस हुई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

ग्रामीणों का आरोप: डराने के लिए हमारे ऊपर दौड़ाए ट्रैक्टर

विवाद के दौरान ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि काम रुकवाने का प्रयास करने पर मौके पर मौजूद भारी वाहनों (ट्रैक्टर और जेसीबी) को जानबूझकर उनकी तरफ तेज गति से दौड़ाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, इस अचानक हुए हमले से वहां मौजूद महिलाओं और बच्चों में हड़कंप मच गया और उन्होंने इधर-उधर भागकर बमुश्किल अपनी जान बचाई। ग्रामीणों ने इसे उन्हें डराने और आंदोलन कुचलने की साजिश करार दिया।

कंपनी प्रबंधन का पलटवार: सरकारी जमीन पर हमारे स्टाफ पर हुआ पथराव

दूसरी ओर, कंपनी प्रबंधन ने ग्रामीणों के इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। कंपनी के प्रतिनिधि अशोक जैन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार के साथ हुए एमओयू (MoU) के तहत उन्हें करीब एक महीने पहले नियमानुसार 8 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई थी। इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट में अस्पताल, सोलर फार्म और बैटरी स्टोरेज जैसी औद्योगिक इकाइयां बननी हैं। कंपनी का आरोप है कि जब वे अपनी आवंटित जमीन पर काम कर रहे थे, तब आंदोलनकारियों ने न सिर्फ सरकारी काम में बाधा डाली बल्कि उनके कर्मचारियों पर पथराव भी किया।