कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की याचिका खारिज, गुवाहाटी हाई कोर्ट का फैसला
नई दिल्ली।कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। गुवाहाटी हाई कोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर चल रही सुनवाई और हालिया कानूनी घटनाक्रमों ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इस मामले का पूरा घटनाक्रम और वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
पवन खेड़ा और असम CM की पत्नी के बीच कानूनी जंग: मुख्य बिंदु
1. मामला क्या है? यह विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुइयां शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया कि उनके पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ जैसे देशों के कई पासपोर्ट और विदेशी संपत्तियां हैं। रिनिकी भुइयां ने इन आरोपों को "फर्जी और एआई-जनरेटेड" बताते हुए खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया।
2. सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत इससे पहले, तेलंगाना हाई कोर्ट ने पवन खेड़ा को एक हफ्ते की 'ट्रांजिट अग्रिम जमानत' दी थी। हालांकि, असम सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और खेड़ा को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे राहत के लिए असम की संबंधित अदालत (गुवाहाटी हाई कोर्ट) का दरवाजा खटखटाएं।
3. गुवाहाटी हाई कोर्ट में स्थिति पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की, जिस पर 21 अप्रैल 2026 को जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की पीठ ने लंबी बहस सुनी।
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बचाव पक्ष (खेड़ा): वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है।
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अभियोजन पक्ष (असम सरकार): सरकारी वकील ने दलील दी कि यह केवल मानहानि का मामला नहीं है, बल्कि इसमें जाली दस्तावेजों और मुहरों का उपयोग कर मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की गंभीर साजिश रची गई है।
हाई कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। फिलहाल खेड़ा के पास कोई कानूनी संरक्षण नहीं है, जिसका अर्थ है कि असम पुलिस के पास उन्हें हिरासत में लेने का विकल्प खुला है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी कड़े शब्दों में कहा है कि खेड़ा को "गुवाहाटी में कानून के सामने आत्मसमर्पण" करना चाहिए।
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