क्या होती हैं ट्रांजिट रिमांड, जिसके आधार पर मेघायल पुलिस सोनम को अपने साथ ले गई
नई दिल्ली। बहुचर्चित राजा रघुवंशी मर्डर मामले में कथित आरोपी पत्नी सोनम को कोर्ट से 72 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिली है। लेकिन सवाल हर किसी के जहन में उठ रहा है कि आखिर ट्रांजिट रिमांड होता क्या है?
दरअसल जब किसी आरोपी को उस राज्य या शहर से गिरफ्तार किया जाता है, जो मूल केस दर्ज होने वाले स्थान से अलग होता है, तब वहां की स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड लेना जरूरी होता है। इसका मकसद होता है कि अदालत की अनुमति से आरोपी को असली केस वाले राज्य में ले जाना। उदाहरण के तौर पर, अगर केस दिल्ली में दर्ज है लेकिन आरोपी को मुंबई में पकड़ा गया है, तब मुंबई की अदालत से ट्रांजिट रिमांड लेकर आरोपी को दिल्ली लाया जा सकता है।
72 घंटे यानी तीन दिन की रिमांड का मतलब है कि पुलिस को इतना समय दिया गया है कि वह आरोपी को संबंधित राज्य की अदालत तक ले जाए। इस दौरान पुलिस को आरोपी की सुरक्षा, मेडिकल जांच और अन्य कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है।
विश्व धरोहर दिवस पर रायपुर में सजी विरासत की अनोखी झलक, संरक्षण पर विशेषज्ञों का मंथन
बंदूक से विकास की ओर: सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी
उमरिया जिले की पूजा सिंह ने रची आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
हमने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रुप में स्वीकार किया है और हम बदलाव लाकर दिखाएंगे : ऊर्जा मंत्री तोमर
दिशा दर्शन भ्रमण आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर मिले दो प्रतिष्ठित पुरस्कार
राज्यमंत्री गौर का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
महतारी वंदन योजना से संवर रही पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर
