नागौर। राजस्थान के बहुचर्चित डांगावास कांड में हाल ही में आए न्यायिक फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बहुचर्चित प्रकरण में अदालत द्वारा सभी चालीस आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ आम जनमानस में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

न्यायिक फैसले के बाद उठा न्याय का सवाल

वर्ष 2015 के इस वीभत्स मामले में अदालत के निर्णय के सामने आने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने सोशल मीडिया के माध्यम से गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जमीन के एक विवाद को लेकर हुए इस खूनी संघर्ष में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई थी और एक लंबा कानूनी सफर तय होने के बावजूद सच्चाई का पूरी तरह सामने न आ पाना चिंता का विषय है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार को यह समीक्षा करनी चाहिए कि जांच और अभियोजन पक्ष के स्तर पर ऐसी कौन सी खामियां रह गईं, जिनकी वजह से पीड़ित परिवारों को निराशा हाथ लगी है।

क्या था वर्ष 2015 का डांगावास प्रकरण

यह पूरा घटनाक्रम चौदह मई दो हजार पंद्रह का है, जब जमीन के मालिकाना हक को लेकर उपजे विवाद ने एक खूनी संघर्ष का रूप ले लिया था। इस दर्दनाक घटना में ट्रैक्टर से कुचलकर और मारपीट कर छह लोगों की हत्या कर दी गई थी, जिनमें दलित वर्ग के लोग भी शामिल थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले स्थानीय पुलिस और सीआईडी के बाद जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी गई थी। लंबी अदालती प्रक्रिया और विभिन्न चरणों में चली तफ्तीश के बाद आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लिया गया था, लेकिन हालिया फैसले में सभी को बरी किए जाने के बाद पीड़ितों के परिजनों ने उच्च न्यायालय में अपील करने का निर्णय लिया है।